बिहार में अपराध एक बार फिर चरम पर

Typography

आज की तारीख में बिहार की कानून-व्यवस्था भगवान भरोसे ही है जब से बिहार की पुलिस व् सूबे के प्रशासन को शराब सूंघने के एक सूत्री एजेंडे में लगाया गया है पूरी विधि-व्यवस्था चरमरा सी गयी है अपराध चरम पर है; लगभग रोज ही बैंक, पेट्रॉल पम्प लूट की घटनाएं हो रही हैं, हत्याओं और रंगदारी मांगे जाने की घटनाएं आम हो गयी हैंसूबे के मुखिया ने तो मानो बढ़ती हुए आपराधिक घटनाओं से मुँह ही मोड़ लिया है

बड़ी घटनाओं पर भी मुख्यमंत्री मौन ही रहते हैं, मुख्यमंत्री महोदय का जब कभी मुँह खुलता भी है तो सिर्फ शराबबंदी और सात निश्चय के सन्दर्भ में बड़बोली बातें ही निकलती हैं। आज की तारीख में इन दोनों (शराबबंदी और सात निश्चय) का हश्र बिहार में क्या है ये किसी से छुपा नहीं है । सात निश्चयों में से सिर्फ एक निश्चय बेहतर सड़क - संदर्भ और सूबे के अन्य हिस्सों से राजधानी पटना के संपर्क को बेहतर करने की दिशा में ही काम होता दिखता है। शेष छः निश्चयों पर महज बयानबाजी ही हो रही है ।
 

वर्तमान मुख्यमंत्री जी का पहला कार्यकाल अपराध नियंत्रण के लिए ही जाना जाता है और इसको लेकर मुख्यमंत्री जी ने काफी सुर्खियां भी बटोरी थीं, लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल से मुख्यमंत्री जी का सर्वोपरि एजेंडा राष्ट्रीय फलक पर छाने और खुद की छवि को खुद ही चमकाने का हो गया और यहीं से अपराध नियंत्रण की कमान ढीली होनी शुरू हुई । मैं मानता हूँ कि आंकड़ों के हिसाब से कई अन्य प्रदेशों से बिहार में अपराध अभी भी कम है और अराजक स्थिति जैसी नौबत अभी नहीं आई है लेकिन जिस प्रकार से हाल के दिनों में अपराध की संख्या में इजाफा हुआ है और जिस प्रकार से पुलिस-प्रशासन की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है वो दिन दूर नहीं जब बिहार का बढ़ता क्राइम-ग्राफ देश-दुनिया में एक बार फिर बिहार की छवि धूमिल करेगा और आम जनता अपराध व् अपराधियों से हलकान होगी ।

शराबबंदी पर जितना फोकस मुख्यमंत्री महोदय का है उसका १० फीसदी भी अगर वो अपराध नियंत्रण पर दे दें तो अपराध और अपराधी भी काबू में रहेगा और मुख्यमंत्री जी की छवि भी चमकती रहेगी ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री महोदय इस बात से अनभिज्ञ होंगे की आज शराबबंदी बिहार के पुलिस-प्रशासन के लिए अवैध कमाई का सबसे सुगम जरिया बन चुका है । बिहार के हरेक कोने में शराब प्रीमियम पर सुलभ है और अवैध शराब की सुलभता बिना पुलिस प्रशासन, शराब माफिया की मिलीभगत के सम्भव है क्या? शराब का अवैध कारोबार और इससे से होने वाली गाढ़ी कमाई ही बढ़ते अपराध की ओर से पुलिस प्रशासन की अनदेखी के मूल में है ।

अभी भी वक्त है मुख्यमंत्री जी, अपराध पर अंकुश लगाने के प्रति आप गंभीर हों अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब बिहार को बदनामी की किसी नयी टैगिंग से एक बार फिर नवाज दिया जाएगा ।


Alok Kumar,
Senior Journalist & Analyst

BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS

PhotoGallery

photogallery module

Your Favorite Recipes on PD

Recipes

Quick Poll

Should Nitish Kumar ditch RJD and Congress and come back to the NDA fold?

Latest Comments