A railway bookstall in India.

बहुत पहले की बात है. सम्भवतः १९८० के आसपास की. मेरी पुस्तक ‘कश्मीर की श्रेष्ठ कहानियां’ राजपाल एंड संस, दिल्ली से छप रही थी. मेरा पोस्टिंग तब नाथद्वारा (उदयपुर) में था. समय निकाल कर मैं दिल्ली आया. राजपाल एंड संस में उस समय हिंदी का काम महेंद्र कुलश्रेष्ठजी देखते थे. मेरी पाण्डुलिपि के बारे में बातचीत हो जाने के बाद हम दोनों के बीच ‘पुस्तक-प्रेम’को लेकर चर्चा चली.

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Use of English words in Hindi language.

आज हर शिक्षित/अर्धशिक्षित/अशिक्षित की जुबां पर ये शब्द सध-से गए हैं। स्टेशन, सिनेमा, बल्ब, पावर, मीटर, पाइप आदि जाने और कितने सैकड़ों शब्द हैं जो अंग्रेजी के हैं मगर हम इन्हें अपनी भाषा के शब्द समझ कर इस्तेमाल कर रहे हैं।

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चीन के नोबेल शांति-पुरस्कार विजेता लियू शियाओबो (Liu Xiaobo) का पिछले दिनों 61 साल की उम्र में निधन हो गया. लियू शियाबो को चीन में लोकतंत्र के समर्थन में आवाज उठाने के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि लोकतंत्र के समर्थन में आवाज बुलंद करने के लिए चीनी सरकार ने उन्हें काफी प्रताड़ित किया. 2009 में उन्हें 11 साल जेल की सजा सुनाई गई थी. इसके साल भर बाद 2010 में उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला. उन्हें यह सम्मान लेने नॉर्वे भी नहीं जाने दिया गया. पुरस्कार समारोह के दौरान सम्मान में उनकी कुर्सी को खाली रखा गया था.

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Broadly speaking, each technology has its own merits and demerits and use of mobile phone is no exception. When you take its positive role into consideration, more especially its impact on students, the use of a mobile phone has far-reaching benefits and advantages.

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इजराइल आजकल चर्चा में है. इस देश ख़ास तौर पर यहूदियों के साथ हमारे देश के मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुरानी परम्परा रही है. दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को प्रगाढ़ करने वाली एक भावपूर्ण घटना आज नेट पर पढ़ने को मिली जिसे पढ़कर मन गदगद हुआ और अपने देश (भारत) की महानता पर गर्व हुआ.

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PD guest columnist Dr. Shiben K. Raina meeting with Bihar native journalist in Sharjah Imran Mojib.

इस बार की यू.ए,ई. यात्रा के दौरान शारजाह में पत्रकारिता के कार्य से जुड़े श्री ‎इमरान ‎मुजीब से मुलाक़ात करने का सुंदर योग बना। दरअसल, मुजीब साहब ने मेरे कुछ लेख ‘पटना डेली’ में देखे-पढ़े थे और उन्हें पसंद किया था। वे मूलतः बिहार से हैं और  पिछले लगभग 20 वर्षों से शारजाह से प्रकाशित होने वाले ‘गल्फ टुडे’ में स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के पद पर कार्य कर रहे हैं। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि मैं इस समय अजमान/यू.ए.ई. में हूँ तो ‘पटना डेली’ के सम्पादक से मेल द्वारा सम्पर्क कर मेरा पता दरियाफ्त किया। ‘पटना डेली’ के सम्पादक ने यह मेल मुझे फॉरवर्ड किया और इस तरह से हमारी मुलाकात का योग बन गया।

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बात शिमला के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडी की है।"डेलविला" नाम से जो आवास मुझे आवंटित किया गया,उसमें दो फ्लैट थे। नीचे वाले फ्लैट में मैं अकेला रहता था और ऊपर वाले  फ्लैट में इंस्टिट्यूट के पूर्व अधिकारी सूद साहब अपने परिवार सहित रहते थे। पति-पत्नी, दो लड़कियाँ और एक बूढ़ी माँ। माँ की उम्र अस्सी से ऊपर रही होगी। काया काफी दुबली। कमर भी एकदम झुकी हुई। वक्त के निशान चेहरे पर साफ तौर पर दिखते थे। सूद साहब की पत्नी किसी सरकारी स्कूल में अध्यापिका थी। दो बेटियों में से एक कॉलेज में पढ़ती थी और दूसरी किसी कम्पनी में सर्विस करती थी। माँ को सभी "अम्माजी" कहते थी। मैं भी इसी नाम से उसे जानने लग गया था।

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The recent decision taken by UAE rulers to rename an Abu Dhabi mosque in honour of Mary, Mother of Jesus is a testimony to uphold the much-cherished open-mindedness and harmony in this region.

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Broadly speaking, wholesome and cordial family bonds are the result of good and appropriate parenting. As a matter of fact, parenting is the process of promoting and supporting the physical, emotional, social, and intellectual development of a child from his infancy to adulthood. It’s the parents who are the real personality-builders, counsellors and mentors of their children.

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देश भर में ९ जून २०१७ को कबीर-जयंती मनाई गयी। 

कबीर (१५वीं शताब्दी) भक्तिकालीन भारतीय साहित्य और समाज के ऐसे युगचेता कवि थे जिनकी हैसियत आज भी एक जननायक से कम नहीं है। अपने समय के समाज में परंपरा और शास्त्र के नाम पर प्रचलित रूढ़ियों, धर्म के नाम पर पल रहे पाखंड-आडंबर, सामाजिक शोषण-असमानता जैसी कई बुराइयों के वे घोर विरोधी थे और इनके विरुद्ध डट कर बोले।

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भारतीय काव्य-शास्त्र में आचार्य मम्मट को सम्माननीय स्थान प्राप्त है। मम्मट कश्मीरी पंडित थे और मान्यता है कि वे नैषधीय-चरित के रचयिता कवि हर्ष के मामा थे। वे भोजराज के उत्तरवर्ती माने जाते है। इस हिसाब से उनका काल दसवी शती का उत्तरार्ध बैठता है।

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अशांति, विभ्रम और संशयग्रस्तता की स्थिति में किसी भी भाषा के साहित्य में उद्वेलन, विक्षोभ, चिन्ताकुलता और आक्रोश के स्वर अनायास ही परिलक्षित होते हैं। कश्मीरी के ‘विस्थापन साहित्य’ में भी कुछ इसी तरह का परिदृश्य नजर आता है।

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The qualities of a good teacher are many and it matters little whether he is a university, college or school teacher because his contribution to the society he is living in, is diverse as well as significant.

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