There’s undoubtedly a sizable number of people in Bihar and elsewhere who believe that Lalu was held guilty by the CBI court in the fodder scams because he belonged to a Backward Yadav caste. They press the argument that this backward caste leader was trying with a missionary zeal to secure “social justice” to the millions coming from the lower strata of the humanity. “The feudal-Manuwadi upper castes couldn’t swallow his rise,” they assert.

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सियासी पार्टियों को व्यक्ति कहने को तो जनता जनार्दन की सेवा करने, ज़ंग-खाई व्यवस्था में बदलाव लाने या फिर देश/समाज का चहुमुखी विकास करने आदि की गर्ज़ से जॉइन करता है।

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राहत फतेह अली खान के गाने 'मेरे रश्के क़मर…' की आजकल बड़ी धूम मची हुई है। सम्भवतः बहुत कम लोग इस गाने के मतले का अर्थ जानते होंगे। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि शब्दों का अर्थ जाने बगैर ही हम वाह-वाह करने लगते हैं, शायद इसलिए क्योंकि सब लोग कर रहे होते हैं।

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राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपना पहला वक्तव्य हिंदी में देते तो कितना अच्छा रहता ! देश की अस्मिता और पार्टी की गरिमा में चार चांद लग जाते। कहना न होगा कि देश के मात्र आठ-दस प्रतिशत लोग अंग्रेज़ी समझते हैं, शेष 90 प्रतिशत हिंदी जान लेते हैं ।

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Why is there a gag order on Yogi Adityanath’s hate speech trial in Allahabad? What is the public interest in covering up these crimes? The hate speeches by Yogi Adityanath were the precursor to extra-judicial killings by the Uttar Pradesh Government once he became Chief Minister. Police encounter killings were not only threatened but carried out.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री के लिये 'नीच' शब्द का प्रयोग कर खुद अपने को और अपनी पार्टी को परेशानी में डाल दिया है। हुआ यों कि गुजरात चुनाव के पहले चरण के प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस के नेता मणि शंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित बयान दिया।

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मालदीव अपने देश भारत से ज़्यादा दूर नहीं है। दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 2000 किलोमीटर है जो हवाई जहाज़ से पांच-छः घण्टों में पूरी हो जाती है। मालदीव की आबादी में ज्यादातर लोग सदियों पहले दक्षिण भारतीय इलाकों (मुख्य रूप से केरल) से गए हुए थे।

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आखिर एक दिन लगभग तीस वर्षों तक बाहर रहने के बाद उसने अपने घर-गाँव को देखने का मन बना ही लिया।

तीस वर्षों की अवधि कोई कम तो नहीं होती। तीस वर्ष! यानी पूरे तीन दशक। बच्चे जवान हो जाते हैं, जवान प्रौढ़ और प्रौढ़ जीवन के आखिरी पड़ाव में पहुंचकर 'क्या पाया, क्या खोया की दुविधा मन में पाले दिन-दिन धकियाते जाते हैं।

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कश्मीर अगर कोई समस्या नहीं है तो फिर वार्ताएं क्यों? यानी सरकार मानकर चल रही है कि कश्मीर की समस्या सुलझी नहीं है और बातचीत अनिवार्य है।

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