कश्मीर शैवदर्शन की जब चर्चा चलती है तो स्वछन्द-भैरव द्वारा प्रस्फुटित “बहुरूपगर्भ स्तोत्र” की ओर ध्यान जाना स्वाभाविक है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए इन स्तोत्रों/श्लोकों का पठन-पाठन बड़ा ही फलदायी और सार्थक माना जाता है।

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कहावत मानव-जीवन के अनुभवों की मार्मिक, सूत्रात्मक और सहज अभिव्यक्ति है। यह एक सजीव और चुभता हुआ व्यावहारिक अनुभव-सूत्र है जो जनमानस की देन और धरोहर है। वे सभी घटनाएं, जो मनुष्य के हृदय को आलोड़ित कर उसके स्मृति-पटल पर स्थायी रूप से अंकित हो जाती हैं, कालांतर में उसकी प्रखर बुद्धि के अवशेषों के रूप में कहावतें बन जाती हैं।

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रात के ग्यारह बजे और ऊपर से जाड़ों के दिन। मैं बड़े मजे में रजाई ओढ़े निद्रा-देवी की शरण में चला गया था। अचानक मुझे लगा कि कोई मेरी रज़ाई खींचकर मुझे जगाने की चेष्टा कर रहा है। अब आप तो जानते ही हैं कि एक तो मीठी नींद और वह भी तीन किलो वज़नी रजाई की गरमाहट में सिकी नींद, कितनी प्यारी, कितनी दिलकश और मज़ेदार होती है।

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माना जाता है कि कश्मीर घाटी से पंडितों का विस्थापन सात बार हुआ है। पहला विस्थापन १३८९ ई० के आसपास हुआ जब घाटी में विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा बलपूर्वक इस्लामीकरण के परिणामस्वरूप हजारों की संख्या में पंडित या तो हताहत हुए या फिर अपनी जान बचाने के लिए भाग खड़े हुए। इस बीच अलग-अलग कालावधियों में पाँच बार और पंडितों का घाटी से निष्कासन हुआ। सातवीं और आखिरी बार पंडितों का विस्थापन १९९० में हुआ।

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पिछले दिनों राहुल गाँधी ने खाड़ी देश बहरीन की यात्रा की । कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान बहरीन में राहुल गांधी ने वहां एक कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए अपने देश की वर्तमान सरकार की खासी बुराई की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबी हटाने, रोजगार देने और शिक्षा-व्यवस्था में सुधार लाने के बजाय नफरत फैलाने और समाज को जातियों में बांटने का काम कर रही है।

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सियासी पार्टियों को व्यक्ति कहने को तो जनता जनार्दन की सेवा करने, ज़ंग-खाई व्यवस्था में बदलाव लाने या फिर देश/समाज का चहुमुखी विकास करने आदि की गर्ज़ से जॉइन करता है।

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राहत फतेह अली खान के गाने 'मेरे रश्के क़मर…' की आजकल बड़ी धूम मची हुई है। सम्भवतः बहुत कम लोग इस गाने के मतले का अर्थ जानते होंगे। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि शब्दों का अर्थ जाने बगैर ही हम वाह-वाह करने लगते हैं, शायद इसलिए क्योंकि सब लोग कर रहे होते हैं।

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राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपना पहला वक्तव्य हिंदी में देते तो कितना अच्छा रहता ! देश की अस्मिता और पार्टी की गरिमा में चार चांद लग जाते। कहना न होगा कि देश के मात्र आठ-दस प्रतिशत लोग अंग्रेज़ी समझते हैं, शेष 90 प्रतिशत हिंदी जान लेते हैं ।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री के लिये 'नीच' शब्द का प्रयोग कर खुद अपने को और अपनी पार्टी को परेशानी में डाल दिया है। हुआ यों कि गुजरात चुनाव के पहले चरण के प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस के नेता मणि शंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित बयान दिया।

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मालदीव अपने देश भारत से ज़्यादा दूर नहीं है। दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 2000 किलोमीटर है जो हवाई जहाज़ से पांच-छः घण्टों में पूरी हो जाती है। मालदीव की आबादी में ज्यादातर लोग सदियों पहले दक्षिण भारतीय इलाकों (मुख्य रूप से केरल) से गए हुए थे।

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आखिर एक दिन लगभग तीस वर्षों तक बाहर रहने के बाद उसने अपने घर-गाँव को देखने का मन बना ही लिया।

तीस वर्षों की अवधि कोई कम तो नहीं होती। तीस वर्ष! यानी पूरे तीन दशक। बच्चे जवान हो जाते हैं, जवान प्रौढ़ और प्रौढ़ जीवन के आखिरी पड़ाव में पहुंचकर 'क्या पाया, क्या खोया की दुविधा मन में पाले दिन-दिन धकियाते जाते हैं।

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कश्मीर अगर कोई समस्या नहीं है तो फिर वार्ताएं क्यों? यानी सरकार मानकर चल रही है कि कश्मीर की समस्या सुलझी नहीं है और बातचीत अनिवार्य है।

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भारत एक विशाल देश है जहाँ विभिन्न धर्मों व संप्रदायों को मानने वाले लोग रहते हैं। अतः यहाँ मनाए जाने वाले त्यौहार और पर्व भी अनेक हैं । ये त्यौहार जहाँ हमारे जीवन में आनंद, उमंग और उत्साह का संचार करते हैं, वहीं हमारी अद्भुत,अनमोल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करते हैं । 

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