मालदीव - समुद्र का एक दुर्लभ सौंदर्य

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मालदीव अपने देश भारत से ज़्यादा दूर नहीं है। दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 2000 किलोमीटर है जो हवाई जहाज़ से पांच-छः घण्टों में पूरी हो जाती है। मालदीव की आबादी में ज्यादातर लोग सदियों पहले दक्षिण भारतीय इलाकों (मुख्य रूप से केरल) से गए हुए थे।

कहा जाता है कि सीलोन (श्रीलंका) के प्रभाव में पहले यहां के लोग बौद्ध थे। बाद में 12वीं सदी में यह एक इस्लामिक देश हो गया, जो यह आज भी है। वैसे इतिहास बताता है कि यहां पर आबादी तीन हजार साल पहले भी मौजूद थी। विद्वानों का मत है कि इसका नाम संस्कृत के मालाद्वीप यानी द्वीपों की माला से बना है। 

सोलहवीं सदी से पहले पुर्तगालियों, फिर डच और अंत में अंग्रेजों का उपनिवेश रहने के बाद यह देश 1965 में आजाद हुआ। बमुश्किल सवा तीन लाख की आबादी वाले इस देश की एक तिहाई जनसंख्या राजधानी माले में रहती है।  इस देश के कुल क्षेत्रफल में केवल एक फीसदी हिस्सा जमीन का है। बाकी निन्यानवे फीसदी पानी ही पानी।

यहां 26 द्वीप समूहों में 1192 छोटे-छोटे द्वीप हैं जिनमें से केवल दो सौ पर ही लोग रहते हैं। इसके अलावा 87 द्वीप खास तौर पर टूरिस्ट रिसॉर्ट के लिए हैं।

लोगों का मानना है कि समुद्री नज़ारे के लिए मालदीव का विश्व में मुकाबला नहीं है। यही कारण है कि समुद्र के इस दुर्लभ सौंदर्य को देखने के लिए यहां विदेशी सैलानी खूब आते हैं जिनमें नवविवाहित दंपतियों की संख्या अधिक रहती है।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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