मैं तुम्हें प्रेमचंद कहूं, तू मुझे दिनकर कह…

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अक्सर व्यक्ति की प्रशंसा उसकी योग्यता के कारण होती है जो वास्तविक प्रसंशा कहलायेगी। कइयों की उनके ‘उपयोगितापरक’ पद पर आसीन होने के कारण होती है जो मात्र चापलूसी कहलाएगी। कुछ लोग समारोहों में औपचारिकता निभाने के लिए या फिर शिष्टाचारवश भी अगले की प्रशंसा में शब्दकोश लुटा देते हैं। यों, कभी-कभी ऊंचे या गरिमाशाली पद पर आसीन रहने वालोँ की भी मन मार कर प्रशंसा करनी पडती है।

अक्सर व्यक्ति की प्रशंसा उसकी योग्यता के कारण होती है जो वास्तविक प्रसंशा कहलायेगी। कइयों की उनके ‘उपयोगितापरक’ पद पर आसीन होने के कारण होती है जो मात्र चापलूसी कहलाएगी। कुछ लोग समारोहों में औपचारिकता निभाने के लिए या फिर शिष्टाचारवश भी अगले की प्रशंसा में शब्दकोश लुटा देते हैं। यों, कभी-कभी ऊंचे या गरिमाशाली पद पर आसीन रहने वालोँ की भी मन मार कर प्रशंसा करनी पडती है।

हमारे एक परिचित वर्षों तक सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। जब तक पद पर रहे, प्रसंसकों से घिरे रहे। उनसे मिलना नुश्किल था। पदच्युत होते ही सड़क पर आ गए।

आज समाज का चलन कुछ ऐसा हो गया है कि हर कोई खुद की बात करना चाहता है, खुद की ही चर्चा सुनना चाहता है। साहित्य के मामले में तो यह चलन (प्रशंसगिरी) बढती ही जा रही है। सोशल नेटवर्किंग का जमाना आ गया है। प्रशंसालोलुप और यशकामी लेखक वाट्सएप और फेसबुक का उपयोग करके अपनी रचनाएं साझा करके प्रशंसा चाहते हैं। ऐसे लोगों में ‘मैं तुम्हें प्रेमचंद कहूं, तू मुझे दिनकर कह’ की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।

आत्म-प्रशंसा पाने की यह प्रवृत्ति साहित्य के लिए बेहद खतरनाक है। कहने की ज़रूरत नहीं है कि कुछ लोगों की सेहत के लिए आत्मप्रशंसा का टॉनिक बेहद जरूरी होता जा रहा है। ऐसे महानुभाव जब तक किसी से अपनी प्रशंसा में दो-चार शब्द ना सुने लें, इन्हें रोटियां नहीं पचती और ना ही रात को नींद ठीक तरह से आती है और यदि भूल से आ भी जाये तो बुरे-बुरे सपने आते हैं। इसलिए सुबह जल्दी जागकर व्हाट्सअप्प/फेस-बुक खोलकर अपनी पोस्ट्स पर आये लाइक्स और टिप्पणियों की दुबारा जांच करने में लग जाते हैं ।


shiben rainashiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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