भारतीय वायु सेना के हमले में मरे आतंकवादियों पर बहसबाजी

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पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण अड्डे पर भारतीय वायु सेना के हमले में मरे आतंकवादियों की संख्या/गिनती के बारे में पिछले कुछ दिनों से बहसबाजी हो रही है। एक बात समझ में नहीं आरही। वायुसेना बमवर्षा कर सकुशल अपने क्षेत्र में तुरत-फुरत लौटने का यत्न करेगी या लाशों की गिनती करने में जुट जायगी?

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वायुसेना के पायलट का काम टागरेट को भेदना होता है, न कि उससे यह अपेक्षा करना कि हमले के बाद विमान को लैंड कर वह पहले मारे गए आतंकियों की संख्या को गिने।

सुनने में आया है कि बालाकोट में 300 मोबाइल फोन सक्रिय थे। इसका मतलब यह हुआ कि लगभग इतने ही लोग इस जगह पर मौजूद थे। स्वाभाविक है कि इन मोबाइल फोनों का इस्तेमाल पेड़-पत्ते नहीं कर रहे थे बल्कि जीते जागते मनुष्य कर रहे थे।

पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना की ओर से की गई एयर स्‍ट्राइक पर वायुसेना प्रमुख का यह कथन भी मायने रखता है कि “हमारा काम आतंकी ठिकानों को तबाह करना होता है, उनके शवों की गिनती करना नहीं है। हम कोई लक्ष्‍य साधते हैं तो उसे तबाह कर ही देते हैं।"

समय आ गया है कि इधर-उधर कि बात न कर समस्त राजनीतिक दल एकजुट होकर भारत की जनता के साथ मिलकर सेना का समर्थन करें और उसका हौसला बढ़ाएं। ऐसा करने से देश की संप्रभुता और अखंडता को बल मिलेगा और देश विरोधी ताकतें परास्त होंगी।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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