मोबाइल क्लिप को वायरल करना क्या समझदारी है?

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मोब-लिन्चिंग की, छेड़खानियों की, झगड़े फसाद की, मार-कुटाई की, हत्याओं आदि की घटनाएँ बढ़ रही हैं और इनकी वीडियो-क्लिप्स हमें आये दिन टीवी चैनलों पर या अन्यत्र देखने को मिलती हैं।

प्रश्न यह है कि इनको शूट कौन और कैसे करता है? शूट करने वाले को क्या 'इल्हाम' या खुदाई-खबर रहती है कि अमुक जगह पर ऐसा होने वाला है। कहीं सुनियोजित षड्यंत्र के तहत ऐसा तो नहीं हो रहा? या फिर यह सब "मॉक प्ले" तो नहीं! माना कि आजकल सब के पास मोबाइल रहता है और व्यक्ति मौकाए-वारदात पर हुई अप्रिय अथवा सुप्रिय घटना का चित्र-वीडियो ले सकता है। सवाल फिर खड़ा होता है कि क्या यह बन्धु/व्यक्ति इसी काम के लिए वहां पर खड़ा था कि झगड़ा-फसाद-हत्या हो और वह वीडियो ले। बीच में पड़ने की, मामला सुलटाने की या फिर मोबाइल से ही पुलिस को सूचना देने की उसकी कोई नैतिक जिम्मदारी नहीं बनती?

संभव है आक्रोशित-तनावपूर्ण माहौल या फिर किसी और कारण से पुलिस-प्रसाशन तक सूचना न पहुंचा पाना उसकी विवशता रहती हो मगर मोबाइल से ली गयी क्लिप को वायरल करना भी उसकी कोई समझदारी नहीं कहलाएगी। देश और समाज का इससे हित होने के बदले अहित ही होता है और समाज में कटुता और रंजिश का भाव जोर पकड़ता है। ऎसी क्लिप्स को वायरल करने वालों के विरुद्ध कठोर कारवाई होनी चाहिए चाहे वे लोकप्रिय या प्रभावशाली टीवी चैनल ही क्यों न हों!


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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