अनुच्छेद 370 हटाये जाने का विरोध - प्रलोभन या निजी स्वार्थ?

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चौंसठ कश्मीरी पंडितों ने अनुच्छेद 370 हटाये जाने के विरोध में एक वक्तव्य जारी किया है। ये वही लोग हैं जो हर-हमेशा लाभ के पदों पर रहे हैं और पण्डितों के विस्थापन का दंश जिन्होंने कभी झेला नहीं।

कश्मीर से दूर दिल्ली-मुम्बई या अन्य बड़े शहरों में ही हमेशा रहे और पूर्व सरकारों के समर्थक रहे।

विस्थापित पण्डितों से हमदर्दी रखने वाले देशभक्त कश्मीरी और गैर-कश्मीरी दोनों इन के इस व्यवहार पर आश्चर्य-जनित चिंता प्रकट कर  रहे हैं और साथ ही भर्त्सना भी कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि कहीं ये लोग वहां की पूर्व सरकारों के धुर समर्थक तो नहीं हैं? या फिर किसी प्रलोभन या निजी स्वार्थ की वजह से ऐसी 'बयानबाज़ी' तो नहीं कर रहे? 

जहां पूरा देश और कई सारे बाहरी मुल्क भी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की तारीफ कर रहे हैं, वहां ये हैं कि इनको यह बात पच नहीं रही। शायद इन्हीं भद्रजनों के कारण कश्मीरी पंडित समाज को हमेशा नीचा देखना पड़ा है। कश्मीरी समिति, आल कश्मीरी पंडित समाज और 'पनुन कश्मीर' जैसी संस्थाओं को इन 'भद्रजनों' की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए एक निन्दा-प्रस्ताव पारित करना चाहिए।

सरकार चाहे तो इन भद्रजनों की 'कुंडलियों' की जांच बारीकी से करवाए ताकि यह पता लग जाय कि इनके गुण और तार कहाँ-कहाँ और किन-किन कुंडलियों से मिले हुए हैं?


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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