मीडिया-कर्म का दायित्व

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मीडिया-कर्म के दायित्व पर बहुत कुछ लिखा या समझाया जाता रहा है। उसका निष्पक्ष रहना या फिर किसी विचार या पक्ष पर अपना अलग से स्टैंड (stand) लेना, इस पर भी बहुत बहस हो चुकी है।

दरअसल स्टैंड लेते ही मीडिया या मीडिया-कर्मी अपने पावन कर्तव्य से च्युत हो जाता है। स्टैंड लेने का मतलब ही है किसी पक्ष, विचारधारा या फिर विचार के साथ खड़ा हो जाना। यों हर पत्रकार समझता है कि वह जो स्टैंड ले रहा है वह सही है।

कौन नहीं जानता कि मीडिया का काम है सच्चाई को बयाँ करना, अच्छा-बुरा जो भी घटित हुआ है उसे संजीदगी और मर्यादित तरीके से पाठकों/दर्शकों के समक्ष रखना। स्टैंड वे लेते हैं जिनकी अपनी या फिर जिन मीडिया-घरानों से वे जुड़े हैं, उनकी कुछ मजबूरियों हों, उनके कुछ निर्देश हों।

स्टैंड की खातिर तथ्यों या समाचारों को यदि पत्रकार तोड़ता-मरोड़ता है तो यह सरासर स्वस्थ और आदर्श मीडिया की तौवहीन है। मोटे तौर पर स्टैंड लेने का आशय है पार्टीबाजी को न्योता देना या उससे जुड़ जाना।

प्रशिक्षु-पत्रकारों को तो 'निष्पक्ष' पत्रकारिता का ही पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। यह बात अलग है कि समय के साथ-साथ वे भी बाद में 'प्रतिबद्धता' की शरण में चले जाएं।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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