कुमार आशीष: नौजवानों के लिए रोल मॉडल

IPS officer Kumar Ashish.

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जब हम बचपन से स्कूल की दलीज़ पर कदम रखते हैं और फिर धीरे-धीरे पढ़ाई के साथ-साथ हमारे अन्दर सोचने और समझने की प्रवृति परवान चढ़ने लगती है, तभी से हमारे अन्दर अच्छे और बुरे को परखने का ज्ञान विकसित होने लगता है और तब हम आसपास के वातावरण से प्रभावित होना शुरू होते हैं.

जब हम पढ़ते-पढ़ते आठवीं, नवीं और फिर दसवीं कक्षा में पहुँचते हैं तब हमें अपने ऊपर, अपने परिवार, समाज एवं देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास होने लगता है. उस एहसास के साथ जीवन में कामयाब होने का जज़्बा और नाकाम होने का डर सताने लगता है. इसी के साथ हमारे मन में कई प्रकार के प्रश्न उठने लगते हैं. एक तरफ जहां हमें परीक्षा में कामयाब होने की चिंता सताने लगती है वहीं दूसरी ओर हम जीवन में क्या बनना चाहते है, किसकी तरह बनना चाहते है और क्यों बनना चाहते है? ऐसे ही कई सवाल हमारे मन में जन्म लेने लगते हैं, जब हम कुछ करने के बारे में सोच रहे होते है।

जिंदगी में हम क्या बनते हैं इसका गहरा ताल्लुक इस बात से होता है कि हमने अपनी जिंदगी के लिए किसे अपना रोल मॉडल बनाया है। हमारा रोल मॉडल हमेशा ही हमको प्रेरित करता रहता है। यह जरूरी नहीं कि आपका रोल मॉडल कोई बड़ी हस्ती ही हो चूंकि रोल मॉडल वे होता है जिसे देखकर आपको अपने जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा मिले। अक्सर हम रेडियो और टेलीविज़न पर सफल छात्रों का इन्टरव्यूव सुनते हैं जिनका ताल्लुक किसी गावँ या देहात से होता है, अक्सर उनसे दो महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं, उनमें से पहला प्रश्न यह होता है कि वे क्या बनना चाहते हैं तथा दूसरा प्रश्न होता है कि वे किसे अपना आदर्श मानते हैं। हर इंसान अपने जीवन में कामयाब होने के लिए किसी न किसी को अपना रोल मॉडल चुनता है. हम अगर अपने देश की बात करें तो हमारे पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम करोड़ों नौजानो के आदर्श एवं रोल मॉडल रहे हैं. आज हमारे समाज को ऐसे ही रोल मॉडल की ज़रूरत है ताकि उनसे प्रेरणा लेकर नौजवान अपने जीवन में सफल होकर आने वाली पीढ़ी के लिए  रोल मॉडल बन सकें.

अक्सर जब मैं भारत और अपने राज्य बिहार जाता हूँ तो बहुत सारे लोगों से मिलने तथा उनके बारे में जानने का भी मौक़ा मिलता है तथा समय समय पर उनके बारे में लिखता भी रहता हूँ. आज हम आप से एक ऐसे ही यूवा रोल मॉडल की बात करने जा रहे हैं. हम आज बात बात कर रहे हैं कुमार आशीष, IPS की जो बिहार से ही अपनी पढ़ाई शुरू कर दिल्ली के जवाहरलाल यूनिवर्सिटी पहुँचता है और अपनी कड़ी मेहनत और लगन से भारत की सबसे कठिन परीक्षा IPS उतीर्ण कर अपने माँ-बाप, परिवार, समाज, राज्य एवं देश का नाम रौशन करता है.

Kumar Ashish, IPS officer.कुमार आशीष के बारे में किँग अब्दुल अज़ीज़ यूनिवर्सिटी जेद्दा के आसिफ़ रमीज़ दाउदी जो मूलत: खगड़िया के रहने वाले हैं, बताया कि "मुझे काफ़ी दिनों के बाद एक ऐसे IPS ऑफिसर से हुई है जिन्हें समाज के प्रति अपनी दायित्वों का पूरा एहसास है". पहली बार मेरी मुलाक़ात दरभंगा में हुई थी जब मैं उनसे मिलने उनके पास पहुंचा था. उस समय वे दरभंगा के सिटी एस पी थे. सुबह का समय था शायद उस समय सुबह के आठ बज रहे होंगे इसलिए मैं सीधे उन के सरकारी आवास पर गया. मैं पहले ही इनके बारे में इनके कार्य कलापों के बारे में काफी सुन रखा था इस लिए इन से मिलने का शौक भी बढ़ गया था.

जब मैं ने अंदर खबर भेजा तो कुछ की क्षणों में एक नौजवान हाफ पैंट और टी-शर्ट पहने हाथ में दो मोबाईल लिए मेरे सामने आ खड़े हुए. आते ही उन्होंने बड़े ही सभ्य अंदाज़ में मुझ से पूछा कि कहिये क्या बात है? शायद उन्हें ये लगा कि मैं किसी काम से उनके पास गया हूँ. फिर मैं ने उनको बताया के मैं बर्रा, कुशेश्वर स्थान से हूँ जो कि दरभंगा से क़रीब ६०-७० किलो मीटर की दूरी पर है, मैं यहाँ किसी काम से नहीं बल्कि आप का नाम बहुत सुन रखा था इस लिए मिलने चला आया.

ये मेरी उनसे दरभंगा में पहली और आखिरी मुलाक़ात थी. उन्होंने दरभंगा में कुछ ही दिनों के अंदर अपने कामों से जो लोगों के दिलों अपनी जगह बनाई उसे आज भी लोग याद करते हैं. लोगों के अंदर से पुलिस का खौफ दूर किया तथा कम्युनिटी पुलिस की एक मिसाल कायम कर दी. उन्होंने ने पहली ही मुलाक़ात में इतना अच्छा लेक्चर दिया कि मुझे लगा कि इन्हें तो किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर होना चाहिए था. फिर मैं वापस अमेरिका चला आया तो पता चला कि उनका ट्रांसफर बलिया के एस डी पी ओ के तौर पर हो गया है.

फिर मेरी मुलाक़ात इस साल जुलाई के महीने में हुई जब मैं लखमिनिया किसी मुशायरे में गया हुआ था. मुझे कोई उमीद नहीं थी के वहाँ कौन-कौन होगा। जब मैं वहाँ पहुंचा तो देखा के स्टेज पर दूसरे मेहमानों के साथ कुमार आशीष भी बैठे हुए हैं. हमलोग एक दूसरे को देखते ही बड़े गर्मजोशी के साथ मिले और बहुत बातें हुईं। वहाँ पर जब लोगों ने उनके बारे में, उनके काम करने के बारे में बताया तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि आने वाले दिनों में बहुत से नौजवान इनसे प्रेरणा लेकर जीवन में सफल होंगे.

मुशायरे के सयोंजक शाह रशद ने बताया क़ि "कुमार आशीष पुलिस ऑफिसर होने के साथ-साथ एक नेक दिल इंसान भी है जिनके अंदर अच्छे-बुरे को परखने की बे इन्तेहा सलाहियत है". वहीँ बलिया के निवासी ख़ालिद कबीर ने बताया "कुमार आशीष किसी दबाव में आये बिना अपना काम निबटाना अच्छी तरह जानते हैं". फिर जब मैं गर्मी की छुट्टी के बाद वापस अमेरिका आ गया तो पता चला की उनका ट्रांसफर एस पी के तौर पर मधेपुरा कर दिया गया है. मुझे पूरा विश्वास है कि मधेपुरा के लोगों को भय मुक्त वातावरण देने में सफल होंगे तथा नौजवानों में जोश और उत्साह बढ़ाते रहेंगे।

यह हमारी खुशकिस्मती है कि आज बिहार के अंदर अरविन्द पांण्डे, विकाश वैभव, मनु महाराज जैसे बहुत ही ईमानदार, क़ाबिल और सुलझे  हुए अफसर मौजूद  हैं जिनके अंदर एक स्वच्छ एवं कुशल प्रशाशन देने की क्षमता भी है और बिहार को आगे ले जाने की सलाहियत भी. आज बिहार को ऐसे सपूतों एवं ईमानदार अफसरों की ज़रुरत है.

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एम जे वारसी जाने-माने भाषावैज्ञानिक एवं विश्लेषक हैं और अमेरिका के वाशिंगटनविश्वविद्यालय में कार्यरत हैं. उनसेThis email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. पर संपर्ककिया जा सकता है.

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